The commercial mentality of the bulk of this society had no other values than material profit and physical pleasure . वऋ-ऊण्श्छ्ष्-यवसायिक मनोवृति के कारण , अधिकतर समाज के पास वसऋ-ऊण्श्छ्ष्-तुगत लाभ तथा भऋतिक आनंद के सिवा , दूसरे अनऋ-ऊण्श्छ्ष्-य कोऋ मूलऋ-ऊण्श्छ्ष्-य नही थे .